ओनियोमेनिया (Oniomania) क्या है? खरीदारी की लत को समझें
ओनियोमेनिया (यूनानी भाषा के शब्द onios यानी बिक्री और mania यानी पागलपन से बना) एक मानसिक बीमारी है जिसे आमतौर पर खरीदारी की लत (कम्पल्सिव शॉपिंग) कहा जाता है। यह एक गंभीर मनोवैज्ञानिक स्थिति है जहां व्यक्ति के पास पैसे न होने या जरूरत न होने पर भी खरीदारी करने की तीव्र इच्छा उठती है।
प्रमुख लक्षण
एक आम खरीदार और ओनियोमेनिया के मरीज के बीच की सीमा बहुत बारीक होती है, लेकिन मरीज में कुछ विशिष्ट लक्षण दिखाई देते हैं:
- खरीदारी करते समय अत्यधिक उत्साह या राहत महसूस होना।
- खरीदारी पूरी होने के तुरंत बाद अपराधबोध, शर्म या पछतावा होना।
- परिवार या दोस्तों से बिल, रसीदें या खरीदे गए उत्पाद छिपाना।
- तनाव, उदासी या चिंता से निपटने के लिए खरीदारी को ही एकमात्र साधन बनाना।
- गंभीर कर्ज में डूबने के बावजूद खरीदारी बंद न कर पाना।
इच्छा का चक्र
खरीदारी की लत का चक्र अन्य लतों की तरह ही होता है। उत्पाद खोजने और कार्ट में जोड़ने की प्रक्रिया के दौरान मस्तिष्क में बड़ी मात्रा में डोपामाइन रिलीज होता है। दिमाग को खुशी असल में खोजने और चुनने की प्रक्रिया से मिलती है, न कि उत्पाद से।
इलाज कैसे करें
इसका इलाज आमतौर पर कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) द्वारा किया जाता है, जो मरीज को उन भावनात्मक कारणों को समझने में मदद करती है जो उन्हें खरीदारी के लिए उकसाते हैं।
इसके अलावा, व्यवहार में बदलाव (रिप्लेसमेंट) भी एक प्रभावी तकनीक है। यहीं पर शॉपिंग सिमुलेटर काम आते हैं। DopaminaShop जैसे मुफ्त सिमुलेटर का उपयोग करके मस्तिष्क सुरक्षित रूप से कार्ट बनाने और चेकआउट का अनुभव कर लेता है, जिससे बिना किसी कर्ज या नुकसान के डोपामाइन की जरूरत पूरी हो जाती है।